सुबह की खुशी - हिंदी कविता
उठा था सूरज पूरब से, चढ़ा था रंग आसमान में, चल रही थी हवा खुशमिज़ाज, था सबकुछ सुन्दर और सुहाना।
कोई गुलशन खिल रहा था, कोई नदी बह रही थी, कोई पंछी गाने गा रहा था, कोई बच्चे खेल रहे थे।
इस सुबह की खुशी में, दिल भर आता है खुशियों से, घुमाता हूँ मुस्कुराते हुए, खुशियों से भरा हुआ ये देश।
सुबह की ये खुशी, हर किसी के दिल में बसती है, इसके बिना जीवन थम जाता है, खुशियों से भरा हुआ ये देश।
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